बिहार सरकार द्वारा संचालित बिहार अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना एक महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याण योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करना है। यह योजना भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव को कम करने और एक समावेशी समाज बनाने के लिए डिजाइन की गई है।
इस योजना के तहत अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपतियों को निम्नलिखित लाभ प्रदान किए जाते हैं:
सरकार द्वारा 1 लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है। इस योजना के तहत दिया जाने वाला अनुदान विवाह के बाद 6 महीने की अवधि के भीतर प्रदान किया जाता है। आवेदक को किसी भी प्रकार की ब्याज दर नहीं देनी पड़ती है। यह पूरी तरह से अनुदान के रूप में दी जाने वाली राशि है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें पूरी करनी आवश्यक हैं:
आवेदक को बिहार राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए। दोनों पति और पत्नी की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। विवाह हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 या अन्य मान्य कानूनों के तहत पंजीकृत होना चाहिए। दोनों पक्षों को भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। आवेदक का कोई भी पक्ष अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति या सामान्य श्रेणी से संबंधित हो सकता है। परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा से कम होनी चाहिए।
इस योजना के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया अत्यंत सरल है। सबसे पहले आवेदक को बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। योजना के संबंध में आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करना होगा। फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी को सही-सही भरना होगा। आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी के साथ फॉर्म को संलग्न करना होगा। पूरा आवेदन पत्र अपने जिले के सामाजिक कल्याण विभाग में जमा करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को एक पावती दी जाएगी।
आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
विवाह प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र या पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक खाता पासबुक, आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, पते का प्रमाण और पासपोर्ट साइज फोटो।
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